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18 वीं शताब्दी में बनी लखनऊ की रेजिडेंसी को बोनसाई से किया जीवंत

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अवध बोनसाई एसोसिएशन की दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

लखनऊ : अवध के नवाबों के जरिए 18 वीं शताब्दी में बनायी गयी लखनऊ की रेजिडेंसी को बोनसाई विशेषज्ञ सौमिक दास ने बोनसाई कला के जरिए जीवंत कर दिया। करीब 1 घंटे तक उन्होंने पत्थरों, घास, बोनसाई पौधे के जरिए मास्क रेजिडेंसी को इस प्रकार संवारा कि सभी निहारते रह गए।
उन्होंने कहा, “लखनऊ में ऐतिहासिक और वास्तुकला से सम्पूर्ण इमारतों की भरमार है, मैंने रेजिडेंसी को उतारने की कोशिश की है। पिछले करीब छह-सात महीने से इस पर मैं काम कर रहा हूं। लखनऊ में आकर रेजिडेंसी को बोनसाई से सजाकर जो लैंडस्केप तैयार किया है वह लोगों को पसंद आए,यही मेरी सोच है।” उन्होंने कहा कि हमारे देश में इतनी बेहतरीन और ऐतिहासिक इमारतें हैं कि जिन पर ही ध्यान रखा जाए तो दुनिया में और कहीं जाने की जरूरत ही नहीं, ये निश्चित रूप से प्रभावशाली हैं। जहां तक इस बोनसाई कार्यशाला की बात है तो निश्चित रूप से यहां के लोग बहुत ही बढ़िया है सीखना चाहते हैं और अपनी कला को दिल से संवारने की ललक या जुनून उनमें है। इसी कारण अवध बोनसाई एसोसिएशन आज देश की प्रमुख बोनसाई संस्था बन चुकी है। लखनऊ में बहुत कुछ है जिसको आप दिखा सकते हैं लेकिन यह धीरे-धीरे धूमिल पड़ती जा रही है। इस कारण अगर आप इन इमारतों को खूबसूरती के साथ दिखा दें तो निश्चित रूप से परिणाम बेहतर होगा। सबसे बड़ी बात कि इन इमारतों को हम कला के साथ दिखा रहे हैं, इससे बड़ी बात और कुछ हो ही नहीं सकती।
अवध बोनसाई एसोसिएशन की प्रेसिडेंट रेनू प्रकाश ने बताया कि दो दिन की वर्कशॉप बहुत ही सफल रही और इसके जरिए हम लोगों ने बहुत कुछ सीखा। इस बोनसाई कला को हम ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकें, यही हमारा उद्देश्य है। बोनसाई विशेषज्ञ सौमिक दास ने रेजीडेंसी मास्क बनाने की कोशिश की है और उन्होंने काफी हद तक इसे हू-ब-हू उतारने में सफलता पायी है। उनकी यह कला, बहुत बड़ी आर्ट है। उन्होंने इसको अपनी कल्पना से गढ़ा है जिसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। उन्होंने बताया कि अवध बोनसाई एसोसिएशन पहले भी ऐसे कार्यक्रम करती रही है और आगे भी करती रहेगी। 21 मार्च को हम फिर एक भव्य आयोजन करने जा रहे हैं।

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