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मानव मन की व्यथा को उजागर कर गया नाटक ‘ असमंजस बाबू की आत्मकथा ‘

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अचला बोस की पुस्तक ‘देवदास’ का हुआ लोकार्पण 

लखनऊ , 27 फरवरी 2024। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय संस्कृति विभाग नई दिल्ली के सहयोग एवं श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति के तत्वावधान में आज से वाल्मीकि रंगशाला संगीत नाटक अकादमी में आरम्भ हुए त्रि-दिवसीय नाट्य समारोह की प्रथम संध्या में उपन्यासकार व नाटककार सत्यजीत रे की मूल कहानी का अख्तर अली के नाट्य रूपान्तरण एवं अचला बोस के निर्देशन में नाटक ‘ असमंजस बाबू की आत्मकथा ‘ का मंचन किया गया।

रंगमंच के पुरोधा स्व. पद्मश्री राज बिसारिया को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित त्रि-दिवसीय नाट्य समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. राजीव कुमार त्रिपाठी, प्राचार्य डीएवी पीजी कालेज ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के साथ प्रभात बोस, जितेंद्र सिंह सहित अन्य रंगकर्मियों ने राज बिसारिया के चित्र पर माल्यार्पण कर उनको श्रद्धाजलि अर्पित की। इस मौके पर अचला बोस द्वारा लिखित पुस्तक ‘ देवदास ‘ का लोकार्पण सुशील कुमार सिंह, राजा अवस्थी और डॉ राकेश ऋषभ ने किया।

नाटक ‘असमंजस बाबू की आत्मकथा’ की कथावस्तु के अनुसार इस समाज मे उसी चीज को महत्व दिया  जाता है, जो लीक से हटकर हो और ये नाटक भी कुछ ऐसे ही पहलू को उजागर करता है। इस नाटक के पात्र असमंजस बाबू लीक से हटकर अपनी सोच के कारण समाज से अलग-थलग पड़ गये, क्योकि वो विश्वास पर नही, विचार पर जोर देते हैं, अतीत की नहीं, भविष्य की चिंता करते हैं, भगवान के बजाय, इंसान की बात करते हैं। उनका मानना है कि विनाश के बिना नवीन चीजों का निर्माण नहीं हो सकता। ऐसी सोच के कारण असमंजस बाबू की कभी किसी से नही पटी, न अपने गुरु से, न अपने पिता से, न अपने मित्र से, न अपने पड़ोसी से और इसी कारण असमंजस बाबू अकेले पड़ गऐ और इस एकांत के अंधकार मे, एक कुत्ते ने उन्हें राह दिखाई, मार्ग दर्शन किया, उनका गुरु बना, जिसे लोग असमंजस बाबू का कुत्ता भी कहते थे।

55 मिनट के इस एकांकी नाटक में असमंजस बाबू की भूमिका में मोहित यादव ने अपने उत्कृष्ट संवाद और दमदार अभिनय से रंगप्रेमी दर्शकों को देर तक अपने आकर्षण के जाल में बांधे रखा। नाट्य नेपथ्य में प्रकाश- मोहम्मद हफीज, तबला- शाहनवाज खान और संगीत – कोमल प्रजापति का योगदान नाटक को सफल बनाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ। अपने सशक्त कथानक के अनुक्रम में नाटक ‘ असमंजस बाबू की आत्मकथा ‘ दर्शकों के लिए हृदयग्राही बना।

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