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धनतेरस पर क्यों खरीदी जाती है झाड़ू ? जानिए क्या है इसका खास महत्व

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साल में एक बार आने वाली दिवाली सभी के लिए खास होती है। इस दिन घर और बाहर दोनों जगहों को दीये की रोशनी से रोशन किया जाता है। इस साल दिवाली 12 नवंबर 2023 को मनाई जाएगी। दिवाली परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला त्योहार है। इसकी शुरुआत धनतेरस से मानी जाती है। हिंदू धर्म में धनतेरस का भी विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। साथ ही माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा अर्चना करना शुभ माना जाता है।
धनतेरस के दिन बर्तन, सोना, चांदी और पीतल खरीदने की मान्यता है। इसके अलावा झाड़ू खरीदने का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने से साल भर घर में बरकत बनी रहती हैं।

क्यों खरीदी जाती है झाड़ू?
धनतेरस पर जहां सोने-चांदी खरीदने का महत्व है। वहीं झाड़ू खरीदने का भी विशेष महत्व है। मत्स्य पुराण के अनुसार, झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। कहते हैं, धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने से घर में बरकत बनी रहती है। साथ ही आर्थिक परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है। इस दौरान फूल और सिंक वाली झाड़ू खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। झाड़ू खरीदने के बाद क्या करें ?
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने के बाद उसपर सफेद रंग का धागा जरूर बांधें। ऐसा माना जाता है कि, धागा बांधने से मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है। इस दौरान ध्यान रहे कि, झाड़ू को साफ हाथों से ही छुंए।

इस बात का रखें ध्यान
इस बात का ध्यान रखें कि झाड़ू को कभी भी खड़ा करके नहीं रखना चाहिए। ऐसे झाड़ू को रखना अशुभ माना जाता है। इसलिए हमेशा सही तरीके से इसे रखें। कोशिश करें कि, झाड़ू को हमेशा ऐसी जगह पर रखें जहां से वो किसी की नजर में ना आए।

पुरानी झाड़ू का क्या करें
पुरानी झाड़ू को घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही आर्थिक स्थिति पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। इसलिए धनतेरस से पहले ही इसे उचित जगह पर छुपा कर रख दें।

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