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टावर विधि से बिना चीरा लगाएं सहारा हॉस्पिटल में एरोटिक वाल्व बदलकर बचायी मरीज की जान

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लखनऊ : प्रतापगढ़ के रहने वाले मरीज की सांस कई वर्षों से फूल रही थी। उनको हाइपरटेंशन के साथ ही सीकेडी यानि किडनी की भी समस्या थी। लगभग दो साल से बेहद परेशान थे और अब जरा भी चलने फिरने में भी दिक्कत महसूस हो रही थी। जब उन्होंने प्रतापगढ़ के ही एक हॉस्पिटल में दिखाया तो उन्होंने जांच के बाद बताया कि हार्ट वाल्व अत्यधिक सिकुड़ा हुआ है परन्तु मरीज की कई समस्याओं को देखते हुए और सभी सुविधाएं न होने की वजह से इलाज के लिए अच्छे हॉस्पिटल में जाने की सलाह दी। तब मरीज ने सहारा हॉस्पिटल में कार्डियोलोजिस्ट डॉक्टर धीरज सिंह से सम्पर्क किया । जब मरीज को डॉक्टर ने देखा तो उसके हृदय में एरोटिक वाल्व के अत्यधिक सिकुड़न के कारण हार्ट फेल्योर हो गया था और हार्ट पंपिंग 35 प्रतिशत हो गयी थी जो सामान्यतः 70% होती है। अधिक आयु होने की वजह से और किडनी की समस्या के कारण मरीज का ओपन हार्ट सर्जरी द्वारा वाल्व रिप्लेसमेंट करना बेहद जोखिम पूर्ण था। मरीज किसी भी तरह से ओपन हार्ट सर्जरी नहीं करवाना चाहता था। तब डॉक्टर धीरज की सलाह पर वह टावर( ट्रांसकैथेटर एरोटिक वाल्व रिप्लेसमेंट) विधि से इलाज के लिए तैयार हो गया। डॉक्टर धीरज ने मरीज को आई सी यू में रखकर अपने आब्सरवेशन में दो तीन दिन तक हॉट फेल्योर को नियंत्रित किया। फिर‌ सहारा हॉस्पिटल की समस्त हार्ट टीम जिसमें वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर धीरज, कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉक्टर विशाल श्रीवास्तव एवं कार्डियक एनएसथीसियोलॉजिस्ट दीपकांर राज सहगल ने
टावर विधि द्वारा बिना चीरा लगाये ट्रांस फीमोरल आर्टरी से जाकर और बिना बेहोश किये वाल्व रिप्लेसमेंट किया। क्योंकि मरीज को किडनी समस्या (रीनल आर्टरी स्टेनोसिस) थी इसलिए केवल 70ml कंट्रास्ट इस्तेमाल किया गया ताकि डाई द्वारा किडनी और डैमेज ना हो जाए। इसके अतिरिक्त मरीज के ईसीजी में पहले से एडवांस हार्ट ब्लॉक होने के कारण टावर के दौरान एरोटिक वाल्व का सही स्थान पर इम्पलान्ट करना अति आवश्यक था अन्यथा मरीज को कम्पलीट हार्ट ब्लॉक हो सकता था, जिसके लिए अतिरिक्त परमानेंट पेसमेकर इम्पलान्ट करना पड़ता।
इतने जोखिम के साथ सहारा हार्ट टीम ने अपनी सूझबूझ से टावर विधी द्वारा मरीज को सफल इलाज प्रदान किया। पुनः इको जांच के बाद पता चला कि इस टॉवर प्रक्रिया को करने के बाद मरीज की हार्ट पंपिंग क्षमता 35प्रतिशत से बढ़कर अब 55 प्रतिशत तक आ गयी थी। बिना दवा के ही तीन दिन में हार्ट फेल्योर में सुधार आ गया और चौथे दिन ही मरीज को डिस्चार्ज भी कर दिया गया। मरीज की किडनी फंक्शनिंग भी अब ठीक हो गयी। मरीज बिना सर्जरी के टावर विधी से इलाज पाकर बेहद संतुष्ट था। जब वह फॉलोअप में डाक्टर को दो महीने बाद दिखाने आया तो वह पूूर्णतया स्वस्थ था और बेहद खुश था। मरीज ने यहां की सुविधाओं व गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की भी प्रशंसा की।

सहारा इंडिया परिवार के वरिष्ठ सलाहकार अनिल विक्रम सिंह जी ने बताया कि हमारे माननीय अभिभावक सहाराश्री जी ने स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्तापूर्ण मानकों को सदैव प्राथमिकता दी है। सहारा हॉस्पिटल उन्हीं के मार्गदर्शन व प्रेरणा से निरंतर हॉस्पिटल को नित नयी ऊंचाईयों की तरफ ले जाने को अग्रसर है।
यहां का कार्डियोलॉजी विभाग दक्ष कुशल व अनुभवी चिकित्सकों सहित अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है और नयी विधियों के प्रयोग से मरीज को इलाज देकर सेवाएं प्रदान करता है।

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